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रायगढ़ किले में एस्ट्रोलैब और शिवराई सिक्के मिले

रायगढ़ किले में एस्ट्रोलैब और शिवराई सिक्के मिले
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रायगढ़ किले में एस्ट्रोलैब और शिवराई सिक्के मिले

श्रेणीविवरण
घटनारायगढ़ किले में एस्ट्रोलैब ('यंत्रराज') की खुदाई
खुदाई किसके द्वारा की गईभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और रायगढ़ विकास प्राधिकरण
प्रमुख कलाकृतियाँ मिलींशिवराय सिक्के, मिट्टी/कांच के बर्तन, हथियार, दीपक
एस्ट्रोलैब विवरण- सामग्री: तांबा-कांस्य <br> - आकार: आयताकार <br> - तिथि: शक 1519 (1597 ईस्वी) <br> - उपयोग अवधि: रायगढ़ का नवीनीकरण (1656), शिवाजी का राज्याभिषेक (1674) <br> - शिलालेख: संस्कृत (देवनागरी लिपि), शब्द "मुख" (सिर) और "पूंछ" (पूंछ) <br> - नक्काशी: कछुआ/सांप जैसी आकृतियाँ
एस्ट्रोलैब का उद्देश्यज्योतिषियों और नाविकों द्वारा तारों को ट्रैक करने और दिशाओं की गणना करने के लिए उपयोग किया जाता था।
रायगढ़ किले का महत्व- शिवाजी महाराज की दूसरी राजधानी <br> - राज्याभिषेक स्थल (6 जून 1674, पदवी "छत्रपति") <br> - यूनेस्को के लिए नामांकित 12 किलों ("भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य") का हिस्सा <br> - मराठा पहाड़ी किले वास्तुकला का उदाहरण
छत्रपति शिवाजी महाराज- जन्म: 19 फरवरी 1630, शिवनेरी किला <br> - कुल: भोंसले <br> - संस्थापक: मराठा साम्राज्य <br> - प्रमुख युद्ध: प्रतापगढ़ (1659), पवन खिंड (1660), सूरत (1664), पुरंदर (1665), सिंहगढ़ (1670), संगमनेर (1679) <br> - वाघ नख: अफजल खान को मारने के लिए इस्तेमाल किया गया (1659) <br> - उपाधियाँ: छत्रपति, शाकाकर्ता, हिंदव धर्मोद्धारक <br> - प्रशासन: अष्टप्रधान परिषद, रैयतवारी प्रणाली, मजबूत नौसेना बल, छापामार युद्ध के प्रणेता

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