बिहार का मखाना महोत्सव बेंगलुरु में
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| आयोजन | मखाना महोत्सव |
| आयोजक | बिहार सरकार |
| स्थान | बेंगलुरु |
| अवधि | दो दिवसीय आयोजन |
| उद्देश्य | कर्नाटक में बिहार के मखाना और अन्य खाद्य उत्पादों का बाजार विस्तार करना |
| मुख्य आकर्षण | - बिहार को मखाना उत्पादन में अग्रणी के रूप में प्रचारित करना |
| - दक्षिण भारतीय बाजारों में मखाना को पेश करना | |
| मखाना उत्पादन | - बिहार भारत के 50% मखाना उत्पादन में योगदान देता है |
| - उत्तरी राज्यों में मजबूत मांग | |
| बाजार विस्तार | बेंगलुरु को दक्षिण भारतीय राज्यों (तमिलनाडु, केरल) के लिए प्रवेश द्वार के रूप में चुना गया |
| शोध पहल | - राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा स्थापित |
| - शोध में मछली जैसी अन्य जलीय फसलें भी शामिल हैं | |
| जीआई टैग | मिथिला मखाना को 2022 में जीआई टैग प्राप्त हुआ |
| आर्थिक प्रभाव | - 2023-24 में बाजार 150 करोड़ रुपये तक पहुंच गया |
| - 2023-24 में 2022-23 की तुलना में 30% वृद्धि | |
| - बिहार में रोजगार और उद्योग को बढ़ावा मिला | |
| सांस्कृतिक महत्व | - मिथिला मखाना मिथिला की तीन प्रतिष्ठित सांस्कृतिक पहचानों में से एक है (पान, मखान, मछ) |
| - मैथिल ब्राह्मणों के कोजागरा त्योहार में मनाया जाता है |

