छत्तीसगढ़ की पहली सौर ऊर्जा संचालित कोयला खदान PEKB
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| घटना | पीईकेबी, छत्तीसगढ़ की पहली पूरी तरह से सौर ऊर्जा से चलने वाली कोयला खदान बनी |
| स्थान | परसा ईस्ट और कांता बासन (पीईकेबी) कोयला खदान, छत्तीसगढ़ |
| प्रमुख महत्व | सौर ऊर्जा के माध्यम से पूरी तरह से ऊर्जा आत्मनिर्भर |
| कोयला आपूर्ति प्रभाव | 8 करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली उत्पादन के लिए कोयले की आपूर्ति करता है। |
| पर्यावरणीय लाभ | 25 वर्षों में 400,000 टन कार्बन उत्सर्जन कम होने की उम्मीद (जोकि 25 लाख पेड़ लगाने के बराबर है) |
| छत्तीसगढ़ के कोयला भंडार | भारत के कुल कोयला भंडार का 16%; राज्य कोयला उत्पादन में दूसरे स्थान पर है (भारत के उत्पादन में 18% का योगदान) |
| प्रमुख कोयला क्षेत्र | रायगढ़, सरगुजा, कोरिया, कोरबा जिले; 44,483 मिलियन टन की पहचान की गई भंडार |
| खदानों की वैश्विक रैंकिंग | एसईसीएल की गेवरा (2nd) और कुसमुंडा (4th) दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से हैं। |
| उत्पादन क्षमता | 100 मिलियन टन वार्षिक (भारत के कोयला उत्पादन का 10%) |
| खनन प्रौद्योगिकी | विस्फोट-मुक्त, पर्यावरण के अनुकूल संचालन के लिए सरफेस माइनर्स का उपयोग करता है। |

