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प्रयागराज में मियावाकी तकनीक से हरियाली

प्रयागराज में मियावाकी तकनीक से हरियाली
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प्रयागराज में मियावाकी तकनीक से हरियाली

पहलूविवरण
घटनाप्रयागराज नगर निगम ने मियावाकी तकनीक का उपयोग करके घने जंगल विकसित किए।
तकनीकमियावाकी तकनीक
विकसितकर्ताजापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी (1970 के दशक)
मुख्य विशेषताएँ- देशी प्रजातियों को एक साथ घने रूप में लगाना तेजी से विकास के लिए।
- पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं, प्राकृतिक जंगलों की नकल करते हैं।
- मिट्टी की गुणवत्ता, जैव विविधता और कार्बन अवशोषण में सुधार करता है।
- प्रदूषित और बंजर भूमि को हरे-भरे पारिस्थितिक तंत्र में बदलने में प्रभावी।
लाभ- औद्योगिक कचरे का प्रबंधन, धूल, गंदगी और दुर्गंध को कम करता है।
- वायु गुणवत्ता में सुधार, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है।
- वायु और जल प्रदूषण को कम करता है, मिट्टी के कटाव को रोकता है, जैव विविधता को बढ़ाता है।
- तापमान अंतर को कम करता है, तापमान में 4 से 7 डिग्री सेल्सियस की कमी लाता है।
प्रकार विविधता- फलदार पेड़: आम, महुआ, नीम , पीपल , इमली , आंवला , बेर ।
- औषधीय और सजावटी पौधे: तुलसी , ब्राह्मी , हिबिस्कस , कदंब , बोगनवेलिया , जंगल जलेबी।
- अन्य प्रजातियां: अर्जुन , सागौन , शीशम , बांस , कनेर (लाल और पीला) , टेकोमा , कचनार , महोगनी , नींबू, सहजन।
पर्यावरणीय प्रभाव- जैव विविधता को बढ़ाता है, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करता है, जानवरों और पक्षियों के लिए आवास बनाता है।
उद्देश्यशुद्ध हवा प्रदान करना, स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देना और ऑक्सीजन बैंक स्थापित करना।

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