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रामचंद्र गुहा की नई पुस्तक: भारतीय पर्यावरणवाद की उत्पत्ति

रामचंद्र गुहा की नई पुस्तक: भारतीय पर्यावरणवाद की उत्पत्ति
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रामचंद्र गुहा की नई पुस्तक: भारतीय पर्यावरणवाद की उत्पत्ति

मुख्य पहलूविवरण
लेखकरामचंद्र गुहा
पुस्तक का शीर्षकप्रकृति से बातचीत: भारतीय पर्यावरणवाद की उत्पत्ति
मुख्य विषयभारत की अनूठी पारिस्थितिक विरासत और भारतीय पर्यावरणवाद की जड़ों की खोज।
मुख्य योगदानपश्चिमी पर्यावरणवाद के दृष्टिकोण को चुनौती देता है, भारत के जीविका पर्यावरणवाद को उजागर करता है, जो विलासिता की चिंताओं के बजाय जीवनयापन की आवश्यकताओं से प्रेरित है।
अग्रणी विचारकदस भारतीय विचारक, जिनमें रबींद्रनाथ टैगोर, राधाकमल मुकर्जी, जे.सी. कुमारप्पा, पैट्रिक गेड्स, अल्बर्ट और गैब्रिएल हॉवर्ड, मीरा (मेडेलीन स्लेड), वेरियर एल्विन, के.एम. मुंशी, एम. कृष्णन शामिल हैं।
मीरा का गांधीवादी चार्टरपारिस्थितिक सामंजस्य, सादा जीवन और विकेंद्रीकरण की वकालत करता है, जिसमें हिमालयी जंगलों और ग्रामीण स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
औपनिवेशिक प्रभावब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के कारण वनों की कटाई, संसाधनों का दोहन और पारिस्थितिक गिरावट हुई, जिसे भारत ने आजादी के बाद भी जारी रखा।
वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियाँवायु प्रदूषण, भूजल स्तर में कमी, जैव विविधता की हानि, नदियों का अवक्रमण और अस्थिर विकास।
युवा और वैज्ञानिक जागरूकतापारिस्थितिकी, जल विज्ञान और शहरी नियोजन पर युवाओं की बढ़ती भागीदारी और वैज्ञानिक ध्यान परिवर्तनकारी बदलाव की उम्मीद प्रदान करते हैं।
लेखक की पृष्ठभूमिप्रसिद्ध इतिहासकार, पर्यावरणविद् और महात्मा गांधी के जीवनीकार। उनकी उल्लेखनीय कृतियों में द अनक्वाइट वुड्स, इंडिया आफ्टर गांधी और गांधी बिफोर इंडिया शामिल हैं।

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