त्रिपुरा की महिला ने तमिल परंपराओं के साथ मनाया थलाई पोंगल
| सारांश/स्थिर | विवरण |
|---|---|
| खबरों में क्यों? | त्रिपुरा की महिला ने तमिल परंपरा को अपनाया थलाई पोंगल उत्सव में |
| उत्सव मनाने वाले | सुप्रिया (त्रिपुरा से) और थिलीपन (सथनकुलम, थूथुकुडी से) |
| त्रिपुरा में पोंगल का नाम | त्रिपुरा में हंगराई के नाम से जाना जाता है |
| सांस्कृतिक महत्व | तमिल महीने के पहले दिन और फसल की शुरुआत का प्रतीक |
| पर्यटकों की भागीदारी | स्पेन, फ्रांस, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, इंग्लैंड, अमेरिका से 75 से अधिक पर्यटक |
| पारंपरिक भोजन | केले के पत्तों पर 25 प्रकार के व्यंजन परोसे गए |
| सांस्कृतिक प्रदर्शन | नायंदी मेलम, करकाट्टम, कावड़ीअट्टम, सिलंबम, और अन्य |
| पारंपरिक गतिविधियाँ | जल्लीकट्टू, बैलगाड़ी दौड़, कबड्डी, सिलंबम, उरी ऐत्थल |
| ग्रामीण शिल्प | मिट्टी के बर्तन बनाना, बांस की बुनाई, मेंहदी लगाना |
| पोंगल अनुष्ठान | पोंगल के बर्तनों में दूध उबालना, सूर्य देव की पूजा |
| सामुदायिक भागीदारी | सभी समुदायों को शामिल किया गया, जिसमें सेंट सुसैयप्पर चर्च के ईसाई भी शामिल हैं |

